ऋग्वेदः मण्डलं 4

by GyandootNova

₹427

100+ readers • Lifetime access • Instant delivery

ऋग्वेदः मण्डलं 4 — GyandootNova द्वारा। ₹427 में पढ़ें, तुरंत access, सभी devices पर। GyandootNova पर सुरक्षित checkout।

  • 🔒 100% Secure Payment
  • SSL Secured Checkout
  • UPI / Card / NetBanking (Razorpay + PayPal)
  • 7-day 100% Money-Back Guarantee
  • Lifetime Access — no subscription

Free Preview — पहला अध्याय

Complete chapter

त्वां ह्य॑ग्ने॒ सद॒मित्स॑म॒न्यवो॑ दे॒वासो॑ दे॒वम॑र॒तिं न्ये॑रि॒र इति॒ क्रत्वा॑ न्येरि॒रे । अम॑र्त्यं यजत॒ मर्त्ये॒ष्वा दे॒वमादे॑वं जनत॒ प्रचे॑तसं॒ विश्व॒मादे॑वं जनत॒ प्रचे॑तसम् ॥ ४.००१.०१ हे अग्नि, आपने यज्ञ के द्वारा देवताओं को अमर्यादित रूप से प्रसन्न किया। आप अमर्यादित देव को अपने द्वारा मरते मनुष्यों में भी प्रतिष्ठित करते हैं। यज्ञ के माध्यम से आपने सम्पूर्ण जगत में देव को प्रतिष्ठित किया। O

पहला अध्याय मुफ़्त पढ़ा आपने। पूरा ग्रंथ पढ़ने के लिए ₹427 में unlock करें।

Unlock Now — ₹427

7-day refund guarantee • Secure Razorpay/PayPal checkout • Instant access

Table of Contents (2 chapters)

  1. 1. Complete chapter
  2. 2. cupan code